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Tuesday, October 14, 2008

क्या पति भी करवा चौथ का व्रत करे

दो दिन बाद करवा चौथ का व्रत है. मैं तो इस व्रत को कर रही हूँ लेकिन मेरे पति भी इस व्रत को साथ में रखने की जिद पाले हैं. मैं उन्हें समझा समझा कर थक गयी कि ये व्रत महिलाओं के लिए है लेकिन वो नही मानते. उनका तर्क है कि जब तुम अगले जनम में मुझे पाने के लिए पूजा कर सकती हो तो मैं भी अगले जनम में तुम्हे पाने के लिए पूजा क्यों नही कर सकता. मैं दुविधा में हूँ. एक तरफ़ तो खुशी है कि चलो वो मेरा साथ दे रहे हैं और मेरी भावनाओं का सम्मान कर रहे हैं. दूसरी तरफ डर हैं कि कही सासू माँ को पता चल गया तो कहेंगी मेरे बेटे को जोरू का गुलाम बना लिया. आजकल के पति भी यही चाहते है कि केवल पत्नी ही क्यों दिन भर भूकी प्यासी रहे क्या केवल पत्नी को ही वो पति रूप में चाहिए. क्या वो अगले जनम में उसे ही पत्नी के रूप में नही पाना चाहते. यदि ऐसा नही है तो किसी के भी व्रत का कोई औचत्य नही है.

सच में ये परस्पर प्यार और आस्था का त्यौहार है. में अगले जनम में उनका वरन करू और वो मुझे ही अगले जनम में अपने साथ पाये. यही प्रार्थना भगवान् सुनेंगे. भगवान सुनते है या नही ये तो नही जानती लेकिन इतना जानती हूँ कि त्यौहार की तेयारी और साथ साथ व्रत करने से दोनों में प्यार बढ़ता है. यही प्यार तो परिवार की नींव है और हम तो इस जनम के बारे में सोचने वालो में से हैं. ये जनम प्यार से गुजार लो, अगला जनम अपने आप तर जायेगा. वैसे भी कहा जाता है कि मानव योनि एक बार ही मिलती है और वो हम इस जनम में प्यार से भोग ले यही काफ़ी है.

नोट _ इस बार में करवा चौथ पर भगवान् से यही मांगूंगी कि अगले जनम कि प्लानिंग न करके इस जनम में भरपूर प्यार का कोटा दे दे. दोनों में आपसी समझ और प्यार ऐसे ही बना रहे, आपको भी यही दुआ करनी चाहिए.